Tuesday, 29 March 2016

वेट सिस्टम मे लगाई सोयाबीन

वेट सिस्टम मे लगाई सोयाबीन के एक पौधे मे लगी 250 से 300 फलिया


महाराष्ट की बीएस228 वेरायटी का 16 से 20 क्विंटल तक होता है उत्पादन

एक एकड़ में 10 किलो बोई जाने वाली इस सोयाबीन को आलमपुर के किसान डाॅ. शिवनारायण चाचरे ने पहली बार एक एकड़ में लगाई।
राजीव साबू।
एक ओर जहां कई किसान खरीफ में सबसे अधिक बोई जाने वाली सोयाबीन से परेषान नजर आ रहे है जिस कारण वह मूंग एवं धान को अधिक महत्व देने में लगे है।लेकिन इन विपरीत परिस्थितियो मे भी आलमपुर के किसान डाॅ.षिवनारायण चाचरे ने इस बार महाराष्ट के परवनी जिले में सबसे अधिक बोई जाने वाली बीएस228 वेरायटी को अपने एक एकड़ खेत मे वेट सिस्टम से लगाई है।जिसे वह 15 हजार रूपऐ क्विंटल के हिसाब से लेकर आये है।यह वेरायटी 110 दिनों मे पक कर तैयार हो जाती है।श्री चाचरे ने इसे 20 जून को लगाकर मोटर से पानी दिया था जिसमें आज पूर्ण रूप दाने बैठ गये है और हर एक पौधे में 250 से 300 फलिया लगी है।तना इतना मोटा हो गया है कि इसे दराती से काटा तक नही जा सकता है।चाचरे ने बताया कि इस सिस्टम से लगाने पर खेतो मे लगे पौधो को जितने पानी की आवष्यकता होती है उतना ही वह ग्रहण करते है और ओवर पानी नाली के माध्यम से खेत से वाहर हो जाता है।यह बीज एक एकड़ मे 10 किलो ही लगता हैं।जिसमें बिमारिया भी कम लगती है।
क्या है वेट सिस्टम -इस सिस्टम मे हर 6 फीट की दूरी पर एक पतली सी नाली निकाली जाती है जिससे खेतो मे अधिक पानी होने पर नाली के माध्यम से खेत से बाहर निकल जाता है और खेतो मे पानी  भरा नही  रहता जिससे पौधो के तनो मे सड़न और गलने जैसी बिमारिया भी नही लगती है। बोबनी के  समय भी इसे इस प्रकार से बोया जाता है कि हर एक पौधे की दूरी कम से कम 6 इंच हो जिस कारण बोया जाने वाला बीज भी कम लगता है और पौधा भी स्वस्थ रहता है जिससे इसकी पैदाबार चार गुनी बढ़ जाती है।

जवारो का विसर्जन

अवोला ब्रत का हुआ समापन,किया जवारो का विसर्जन

आयोजन :- 24-09-2014
नौ दिनो से तीन स्थान पर हो रही थी पूजा-पाठ


ग्राम में रहने वाले गुर्जर समाज की महिलाओ द्वारा पिछले नौ दिनो से अवोला ब्रत रखकर भगवान षिव-पार्वती की पूजा-पाठ की जा रही थी जहां बोये स्थान पर सेवा मां द्वारा जवारों को प्रतिदिन सिंचा जा रहा था और एक सैकड़ा महिलाऐं विधी-विधान से पूजन आरती कर देर रात तक भजनो पर नांच गाने कर रही थी इस दौरान महिलाओं ने अवोला रखकर विषेष पूजा कर आरती की और जवारो को नाचते गाते हंसावती नदी पर विसर्जन किया।

पालीहाउस की खेती से किसान मालमाल

पालीहाउस की खेती से किसान मालमाल

अभी तक 8 लाख रूपये आई बचत 

किसान हाईटेक खेती की ओर बढ़ रहा है युवा और पड़े लिखे जागरूक किसान नई तकनीक के साथ खेती के व्यापार में अपना भाग्य अजमा रहे है और इसमें काफी हद तक सफलता भी मिल रही है। करीबी ग्राम सौताड़ा के युवा किसान सुशील व अतुल बारंगे ने अपने खेत पर 25-25 डिसमिल के उद्यानिकी विभाग से दो पालीहाउस बनवाये और खेती शुरू की जिससे अच्छा मुनाफा कमाया। अभी तक पालीहाउस से चैथी बार फसल बाजार में बिक रही है। तीन बार इंटेलियन ककड़ी  व एक बार धनिया और पालक का उत्पादन ले चुके है। फसलो की पैदावार के लिये हाईब्रिट लगाते है जिसका बोआई  के 35 दिन बाद उत्पादन शुरू हो जाता है। पालीहाउस के निर्माण में करीब 19 लाख रूपये की लागत आई है। फिलहाल एक में टमाटर व दूसरे में ककड़ी फिर से लगाई है। दोनो भाई युवा किसान सुशील व अतुल का कहना है कि सब्जी की खेती वास्तव में लाभ का सौदा है। समय और मेहनत जरूर है लेकिन बाजार की उपलब्धता हो तो सब्जी की खेती से मालमाल हो सकते है।

इस प्रकार बनाये पालीहाउस 

ककड़ी 2.50 से 3 क्विटल निकलती है रोज

ककड़ी का उत्पादन अच्छा होता है रोजाना 2.5 से 3 क्विटल निकलती है वही 3 महिने मे पूरे पालीहाउस से 9 से 10 टन का उत्पादन होता है इसी प्रकार टमाटर भी 10-12 टन की पैदावार देते है। रोज भी 4-5 केरेड निकलता है क्योकि टमाटर की फसल 8 माह का समय भी लेती है।
 पालीहाउस में लगी ककड़ी 

कर रहे जैविक का प्रयोग

पालीहाउस से अच्छे उत्पादन के लिये जैविक आधारित की जा रही है जैविक खाद बीज व दबाईयों का उपयोग किया जा रहा है जिसमें नीम का तेल और गौमूत्र का छिड़काव भी किया जाता है।

Monday, 28 March 2016

गांव में आयोजन

गांव में विकासखण्ड स्तरीय ओडीएफ ओलपिंक खेल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ  जिसमें केवल वही ग्राम पंचायत हिस्सा ले सकी जो आपरेशन मलयुद्ध के तहत खुले में शौचमुक्त हो चुकी है। इस प्रतियोगिता में विकासखण्ड की 37 ग्राम पंचायतों के प्रतिभागियो ने हिस्सा लिया इस प्रतियोगिता में विभिन्न प्रकार की क्रीड़ाओ का आयोजन कराया गया।

आयोजन गांव में

मंहत परिवार और ग्राम वासियों के सहयोग से विशाल भंडारे का आयोजन गांव में रखा गया था। जिसमें गांव सहित क्षेत्र के हजारो भक्त प्रसादी लेने पहुंचे


गेहूं की बालियों

गांव के एक खेत में गेहूं की बालियों में जम रही बर्फिली परत मावठे के बाद बड़ी ठंड से गेहूं की फसल पर आई रौनक।


Saturday, 26 March 2016

मेरा गांव सोडलपुर

सोडलपुर गांव का नक्‍शा 
यह है मेरे गांव सोडलपुर की कहानी -
मेरा गांव सोडलपुर को धर्मनगरी के नाम से भी जाना जाता है। जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतो में मेरे गांव का नाम आता है। इन्दौर-बैतूल राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर स्थित है, गांव तक पहुंचने में कोई दिक्कत नही होती यहां आने के लिये साधन सदैव उपलब्ध होते है। गांव तक आने के लिये जिला हरदा से 21 किमी का सफर बस द्वारा तय करना होगा। विकासखण्ड टिमरनी सें नेशनल हाईवे 59ए पर दक्षिण में मात्र 6 किमी की दूरी पर है। यह तो मेरे गांव तक आने की बात हुई।

श्री गुरू कान्हा बाबा के दर्शन करते भक्‍त 

मेरे गांव की खास बाते 
इसे धर्मनगरी के नाम से भी ग्रामीण पुकारते है क्योकि यहां पर कई संतो ने निवास किया है। जिसमें सबसे पहले श्री गुरू कान्हा बाबा जिनके बारे में पहले ही अपने ब्लाग पर लिख चुका हूँ। श्री गुरू कान्हा बाबा का मेला जिले में प्रसिद्ध है जो साल में एक बार लगता है। इस मेले को देखने के लिये जिले भर से लोग पहुंचते है। यहां पर राजस्थान के रामदेव बाबा का मंदिर, संत श्री श्याम जी सरकार की कुटी, राम जानकी मंदिर सहित कई मंदिर है। गांव के दिन की शुरूवात आज भी सुबह 4 बजे से ग्रामीण फेरी लगते है इसमें गांव के सभी मंदिरो में ग्रामीण पहुंचकर भजन करते है। अधिकत्तर ग्रामीण गांव के गुरू कान्हा बाबा मंदिर में मत्था टेक दिन की शुरूवात करते है। गांव में समय-समय पर कई प्रकार के आयोजन होते रहते है जिसमें प्रमुख रूप से गुरू कान्हा बाबा की महाआरती और रामदेव बाबा का विभाल जम्मा जागरण जिले में महशूर है।

गुरू कान्‍हा बाबा की महाआरती में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालु

गांव की जनसंख्या करीब 6500 के आसपास होगी। गांव की खूबसूरती लिये बसा हुआ है मेरे चारो ओर खेतो में हरियाली छाई हुई है साथ ही हंसावती नदी सोन्दर्यता को ओर बढ़ावा देती है। आज लगभग सभी मकान पक्के है वर्षो से बसा हुआ है इसमें निरन्तर बदलाव आता जा रहा है। पक्की सड़के है, हेडपंप है, नलजल योजना का पानी घरो में पहंुच रहा है। निवासियो की जागरूकता के कारण पंचायत लगातार विकास कर रही। गांव शिक्षित ग्रामीण जन गांव नाम देश के साथ-साथ विदेशो में भी रोशन कर रहे है। राजनीति में भी दोनो दल बराबर है चुनाव भी शांती से होते रहे है। खेलो में यहंा क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है क्रिकेट के यहां जिले के सबसे बड़े आयोजन होते रहते है इस आयोजन में इन्दौर, भोपाल, खंडवा, बुरहानपुर, इटारसी, होशंगाबाद, सत्वास, देवास, बैतूल सहित कई आसपास के जिलो से भी टीम आती है। बालीवाॅल, कबड्डी भी ग्रामीण खेलना पसंद करते  है। गेहूं , सोयाबीन व मूंग के साथ अब सब्जियों की खेती भी की जाती है। डेयरी के माध्यम से दुध व्यवस्याय भी फल फूल रहा है। गांव में लगभग 13 समाज के लोग रहते है जिसमें मारवाड़ी माली समाज और गुर्जर समाज की संख्या ज्यादा है। जिले के नक्शे में शुरू से ही चिन्हित है। 

राजस्‍थान 1100 किमी पैदल यात्रा कर बाबा रामदेव के दर्शन करने जाते ग्रामीण भक्‍त
यह है गांव की खासियत
जिले के बड़े गांवो में शामिल।
जिले का सबसे बड़ा मेला यहां लगता है।
संत श्री गुरू कान्हा बाबा के दर्शन के लिये दूर-दूर से लोग पहुंचते है।
गांव के स्वतंत्रता सैनानी रहे है।
गांव में हायर सेकेण्ड्री तक सरकारी व निजी स्कूल है।
गांव की आर्थिक स्थिति गांव में प्रवेश करते ही नजर आती है।
गांव के कई युवाओ ने देश व विदेश में गांव का नाम रोशन किया है।
गांव की छोटी-छोटी खबरे प्रकाशित होती रहती है।

गांव के श्री गुरू कान्हा बाबा चौक का नजारा